उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धुआं-धार है। समाजवादी पार्टी (SP) और इंडियन नेशनल कांग्रेस के बीच लोक्सभा चुनाव 2024 के लिए चल रही सीट बंटवारे की बातचीत पूरी तरह से टूट गई है। इसका सीधा असर यह हुआ कि व्हायवहारिक रूप से समझौता नहीं होने के कारण, INDIA गठबंधन से समाजवादी पार्टी की दूरियां बढ़ती दिख रही हैं। अब दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश में अलग-अलग ताल ठोकेंगी।
कहने को तो INDIA गठबंधन का उद्देश्य राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को चुनौती देना था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। स्रोतों के अनुसार, रात भर चली बैठकों के बाद भी कोई रास्ता नहीं निकला। अब सवाल यह है कि क्या यह टूटने वाला पहला कड़ी है?
बलिया, मुरादाबाद और बिजनौर: विवाद की असली जगह
बातचीत टूटने का मुख्य कारण तीन लोकसभा सीटें हैं: बलिया, मुरादाबाद और बिजनौर। कांग्रेस की मांग थी कि वह कम से कम इन तीनों सीटों को अपने लिए सुरक्षित रखे। विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय को बलिया से टिकट दिलाने की योजना बनाई गई थी।
लेकिन समझौता यहीं फंस गया। मुरादाबाद उस समय समाजवादी पार्टी की 'सीटिंग' सीट थी, जिसे वे किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं थे। जब रात की लंबी बैठकों में कोई सहमति नहीं बन पाई, तो SP ने आगे बातचीत करने को बेकार मान लिया। इसका मतलब स्पष्ट है: अब राहूल गांधी की यात्रा में अखिलेश यादव साथ नहीं दिखेंगे।
I-PAC के साथ साझेदारी क्यों टूटी?
केवल सीट बंटवारा ही नहीं, एक और बड़ा निर्णय सामने आया है। मनिकंट्रोल हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति बदल दी है। उन्होंने प्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार संगठन Indian Political Action Committee (I-PAC) के साथ अपनी प्रस्तावित साझेदारी खत्म कर दी है।
इस फैसले के पीछे तीन कारण बताए जा रहे हैं:
- कानूनी मुश्किलें: I-PAC मॉडल से जुड़े कुछ कानूनी झंझट।
- चुनावी हार का डर: पिछले चुनावों में मिली हार के बाद बाहरी सलाहकारों पर भरोसा कम होना।
- पार्टी आंतरिक विरोध: पार्टी के कई नेताओं ने I-PAC के साथ गहरे संबंधों का विरोध किया था।
यह फैसला दिखाता है कि अखिलेश यादव अब अपनी टीम और आंतरिक बुद्धि पर ज्यादा भरोसा करना चाहते हैं।
महिला वोट बैंक और 40 हजार रुपये का वादा
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की नजर से देखें तो खेल और भी रोचक है। ABP Live की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए एक बड़ा आर्थिक वादा कर रही है। अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो हर घर की मुखिया महिला को सालाना ₹40,000 दिए जाएंगे।
इसे वे अपनी 'PDA' (सामाजिक न्याय सूत्र) का हिस्सा बता रहे हैं, जिसमें 'A' का मतलब 'आधी आबादी' यानी महिलाएं हैं। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि वे महिला सुरक्षा और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (33% आरक्षण) को लागू करने पर जोर देंगी।
आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में लगभग 1,54,55,288 महिला मतदाता हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि इसे 'गेम चेंजर' कहा जा सकता है। दोनों पक्ष इसी वोट बैंक को जीतने के लिए अपनी रणनीति ढाल रहे हैं।
Frequently Asked Questions
क्या समाजवादी पार्टी अब INDIA गठबंधन से पूरी तरह बाहर है?
व्यावहारिक रूप से हाँ। सीट बंटवारे पर कांग्रेस के साथ सहमति न बन पाने के कारण SP ने अलग से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। हालांकि, औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन राहूल गांधी की यात्रा में अखिलेश यादव के न शामिल होने की संभावनाएं मजबूत हैं।
किसी खास सीट को लेकर विवाद क्यों हुआ?
विवाद मुख्य रूप से बलिया, मुरादाबाद और बिजनौर सीटों को लेकर था। कांग्रेस अजय राय को बलिया से उतारना चाहती थी, जबकि SP मुरादाबाद जैसे अपनी सीटिंग सीट्स को छोड़ने को तैयार नहीं थी। इसी कारण बातचीत टूट गई।
SP ने I-PAC के साथ साझेदारी क्यों खत्म की?
समाजवादी पार्टी ने कानूनी जटिलताओं, पिछले चुनावों में मिली हार के बाद बाहरी सलाहकारों पर विश्वास कम होने, और पार्टी के अंदरूनी विरोध के कारण I-PAC के साथ साझेदारी समाप्त कर दी है। वे अब अपनी आंतरिक टीम पर भरोसा करना चाहते हैं।
अखिलेश यादव का महिलाओं के लिए क्या वादा है?
अखिलेश यादव ने वादा किया है कि यदि SP 2027 में सत्ता में आती है, तो हर घर की मुखिया महिला को प्रति वर्ष ₹40,000 दिए जाएंगे। यह उनके PDA (सामाजिक न्याय) सूत्र का हिस्सा है।